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छत्तीसगढ़

हौसले को मिली उड़ान : सुशासन तिहार ने बदली सूरज कुमार वाकरे की जिंदगी

रायपुर/80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद नहीं छोड़ा शिक्षा का साथ

अब मोटराइज्ड ट्रायसायकल से आत्मनिर्भर होकर कर रहे हैं कॉलेज की पढ़ाई

कहते हैं कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी कठिनाई सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम बस्ती निवासी सूरज कुमार वाकरे ने अपने अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच से इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है। 80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद सूरज ने कभी अपनी परिस्थितियों को अपने सपनों पर हावी नहीं होने दिया और लगातार शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने का प्रयास करता रहा।

कभी हार नहीं माना सूरज ने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहा

वर्तमान में सूरज डॉ. भंवर सिंह पोर्ते महाविद्यालय, पेंड्रा में बी.ए. अंतिम वर्ष का छात्र हैं। हालांकि कॉलेज तक पहुंचना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। सीमित परिवहन सुविधाओं और शारीरिक कठिनाइयों के कारण उन्हें प्रतिदिन कॉलेज आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कई बार इन कठिनाईयों का असर उनकी पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ता था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहे।

सूरज के लिए आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नई पहचान बनकर आई

सूरज के जीवन में सकारात्मक बदलाव तब आया, जब सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत लमना में आयोजित शिविर में समाज कल्याण विभाग द्वारा उन्हें मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई। यह सहायता उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नई पहचान बनकर आई। मोटराइज्ड ट्रायसायकल मिलने के बाद अब सूरज का कॉलेज आना-जाना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। वे बिना किसी की सहायता के अपने कार्य स्वयं कर पा रहे हैं। इससे न केवल उनके समय की बचत हो रही है, बल्कि उनकी स्वतंत्रता और आत्मसम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब वे पूरी एकाग्रता के साथ अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं और भविष्य की बेहतर संभावनाओं के लिए तैयारी कर रहे हैं।

सूरज के जीवन में नई ऊर्जा और नया उत्साह भर दिया

सूरज ने बताया कि मोटराइज्ड ट्रायसायकल ने उनके जीवन में नई ऊर्जा और नया उत्साह भर दिया है। पहले जहां उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब वे अपने अधिकांश कार्य स्वयं कर पा रहे हैं। उनका सपना है कि शिक्षा पूरी कर वे समाज में अपनी अलग पहचान बनाएं और अन्य दिव्यांग युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें। सूरज कुमार वाकरे की यह प्रेरणादायक कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद लोगों के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।

समाज कल्याण विभाग ने दी जीवन को नई दिशा

समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रदान की गई मोटराइज्ड ट्रायसायकल ने उनके जीवन को नई दिशा दी है और उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनने की राह पर आगे बढ़ाया है। सूरज ने इस सहायता के लिए शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

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