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छत्तीसगढ़

सुशासन तिहार से मिली नई उम्मीद, अब ई-रिक्शा से आत्मनिर्भर बनेंगी अघन्तीन

रायपुर/सुशासन तिहार के तहत श्रम विभाग की ई-रिक्शा सहायता योजना ने कोंडागांव जिले के ग्राम चरकई निवासी अघन्तीन नेताम के जीवन में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता की राह खोल दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हाथों ई-रिक्शा प्राप्त करते ही अघन्तीन के चेहरे पर आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की झलक साफ दिखाई दी।

अघन्तीन नेताम पहले अपने परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करने के लिए दैनिक मजदूरी (रेजा-कुली) का कार्य करती थीं। सीमित आय और काम की अनिश्चितता के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं।

इसी दौरान उनके छोटे भाई को श्रम विभाग द्वारा संचालित ई-रिक्शा सहायता योजना की जानकारी मिली। उन्होंने अघन्तीन को योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। अघन्तीन का श्रम विभाग में तीन वर्ष पुराना श्रम पंजीयन था, जो योजना की पात्रता की प्रमुख शर्तों में शामिल है। इसके अलावा ई-रिक्शा संचालन के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस और बैंक के माध्यम से वाहन फाइनेंस की प्रक्रिया भी आवश्यक थी। अघन्तीन ने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन स्वीकृत होने के बाद उन्हें डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि प्राप्त हुई और ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। अब यह ई-रिक्शा उनके लिए रोजगार का स्थायी साधन बनकर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

अघन्तीन का कहना है कि अब वे स्वयं की मेहनत से आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं और अपने माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहयोग करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा मिलने से उन्हें नियमित आय का अवसर मिलेगा, जिससे वे सम्मानजनक और स्वावलंबी जीवन जी सकेंगी। अघन्तीन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा श्रम विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की इस पहल ने उनके जीवन को नई दिशा और नई पहचान दी है।

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