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छत्तीसगढ़

जल संरक्षण बना आजीविका सशक्तिकरण का माध्यम, किसानों को मिली खेती की नई ताकत’

रायपुर/मनरेगा से बदली ग्रामीण तस्वीर: डबरी निर्माण ने रोका पलायन, बढ़ाया सिंचित क्षेत्र और आय’

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत किए जा रहे जल संरक्षण कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। जल संकट, सीमित सिंचाई और पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहे गांवों में अब डबरी निर्माण जैसे कार्य किसानों के लिए आजीविका का मजबूत आधार बन रहे हैं। इससे न केवल खेती का रकबा बढ़ रहा है, बल्कि रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

इसी कड़ी में बलरामपुर जिले के विकासखंड शंकरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत लोधी में मनरेगा के तहत निर्मित व्यक्तिगत डबरी ने एक किसान परिवार सहित पूरे गांव के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

कभी वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसान लवंगसाय आज सिंचाई सुविधा मिलने से सालभर खेती कर रहे हैं और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुछ वर्ष पहले तक गांव में गर्मी के मौसम में कुएं और हैंडपंप सूख जाते थे। भूजल स्तर लगातार गिर रहा था और सिंचाई के अभाव में किसान केवल सीमित खेती कर पाते थे। रोजगार की कमी के कारण कई परिवारों को दूसरे राज्यों और शहरों की ओर पलायन करना पड़ता था। इन चुनौतियों के समाधान के लिए मनरेगा के तहत किसान लवंगसाय के खेत में 1.88 लाख रुपये की लागत से व्यक्तिगत डबरी का निर्माण कराया गया। निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीणों को 658 मानव दिवस का रोजगार भी मिला।

डबरी बनने के बाद वर्षा जल का संरक्षण होने लगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार आया और आसपास के जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता बढ़ी। इसका सीधा लाभ किसानों को मिला। पहले जहां केवल 2 एकड़ क्षेत्र में खेती हो पाती थी, वहीं अब सिंचित क्षेत्र बढ़कर 5 एकड़ तक पहुंच गया है। किसान अब धान के साथ-साथ गेहूं, चना और विभिन्न सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं तथा खरीफ के अलावा रबी और जायद फसलें लेने लगे हैं। जल संरक्षण के इस प्रयास का सामाजिक प्रभाव भी देखने को मिला है। गांव के लगभग 25 परिवारों का पलायन रुक गया है और अब वे स्थानीय स्तर पर खेती एवं कृषि आधारित गतिविधियों से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और गांव में स्थायी आजीविका के अवसर बढ़े हैं।

किसान लवंगसाय बताते हैं कि डबरी निर्माण से सिंचाई की समस्या काफी हद तक समाप्त हो गई है। अब फसल उत्पादन बढ़ा है और वे भविष्य में मछली पालन शुरू कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की योजना बना रहे हैं। मनरेगा के अंतर्गत किए जा रहे जल संरक्षण कार्य केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह किसानों की आय वृद्धि, रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण पलायन रोकने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। ऐसे प्रयास प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों को जल समृद्ध, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

 

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