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छत्तीसगढ़
मोर गांव-मोर पानी अभियान बना ग्रामीण विकास का आधार
रायपुर/रजखेता में नवा तरिया निर्माण से जल संरक्षण के साथ 80 से अधिक श्रमिकों को मिला रोजगार मनरेगा के माध्यम…
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टेक्नोलॉजी
आभासी रिश्तों का मायाजाल और दम तोड़ती आत्मीयता – लेखक: परमानन्द गोयल
कोटा, 22 मई 2026 आज के दौर में हम ‘कनेक्टेड’ तो बहुत हैं, लेकिन वास्तव में ‘जुड़े’ हुए नहीं हैं। तकनीक ने दुनिया को मुट्ठी में समेट दिया है, पर दिलों के बीच की दूरियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। डिजिटल क्रांति के इस युग में स्मार्टफोन और इंटरनेट ने पूरी दुनिया को एक ‘वैश्विक गाँव’ (Global Village) में बदल दिया है। हमारी मित्रता, संवेदनाएँ और संवाद अब एक क्लिक तक सीमित होकर रह गए हैं। लेकिन इस चमकती आभासी दुनिया के पीछे एक कड़वा सच भी छिपा है—हम एक-दूसरे के करीब नहीं आ रहे, बल्कि केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। ‘लाइक’ की भीड़ में अकेला इंसान आभासी दुनिया का आकर्षण असंदिग्ध है। सोशल मीडिया पर मिलने वाले सैकड़ों ‘लाइक’ और ‘कमेंट’ क्षणिक खुशी तो देते हैं, लेकिन वे आत्मीयता का विकल्प नहीं बन सकते। आज हमारे डिजिटल मित्रों की संख्या हजारों में हो सकती है, पर जीवन के कठिन मोड़ों पर साथ खड़े होने वाले लोग बहुत कम रह गए हैं। जन्मदिन पर हजारों शुभकामना संदेश मिल जाते हैं, लेकिन कंधे पर हाथ रखकर हौसला देने वाला अपनापन कहीं खोता जा रहा है। हमने संपर्क (Contact) तो बढ़ा लिया, पर संबंध (Connection) की गहराई धीरे-धीरे कम होती चली गई। डाइनिंग टेबल पर पसरा सन्नाटा आज परिवार एक ही घर में रहते हुए भी अलग-अलग स्क्रीन में कैद होता जा रहा है। डाइनिंग टेबल पर संवाद की जगह मोबाइल ने ले ली है। आत्मीय मुलाकातों की जगह वीडियो कॉल और इमोजी ने संबंधों को औपचारिक बना दिया है। वास्तविक रिश्तों को समय, धैर्य और भावनात्मक निवेश की आवश्यकता होती है, लेकिन तेज़ रफ्तार जीवनशैली में हम इन सबसे बचने लगे हैं। तकनीक सुविधा तो दे सकती है, लेकिन वह उस मानवीय स्पर्श का विकल्प कभी नहीं हो सकती, जो किसी अपने के साथ बैठने, मुस्कुराने या गले मिलने से महसूस होता है। सोशल मीडिया की ‘परफेक्ट लाइफ’ की चमक कई लोगों में हीनभावना, तनाव और अकेलेपन को भी बढ़ा रही है। संतुलन की अनिवार्य आवश्यकता समस्या तकनीक में नहीं, बल्कि उसके अति-उपयोग और उस पर बढ़ती निर्भरता में है। जब आभासी दुनिया वास्तविक जीवन पर हावी होने लगे, तब यह समझ लेना चाहिए कि हम धीरे-धीरे अपनी जड़ों से कट रहे हैं। समय की आवश्यकता है कि हम ‘डिजिटल डिटॉक्स’ अपनाएँ, स्क्रीन टाइम सीमित करें और परिवार व मित्रों के साथ आमने-सामने संवाद को प्राथमिकता दें। रिश्तों को केवल ऑनलाइन उपस्थिति नहीं, बल्कि भावनात्मक उपस्थिति की भी आवश्यकता होती है। निष्कर्ष : तकनीक साधन है, साध्य नहीं हमें तकनीक और आत्मीयता के बीच एक संतुलित रेखा खींचनी होगी। बुजुर्गों के अनुभव सुनने, बच्चों के साथ खेलने और मित्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलने का कोई डिजिटल विकल्प नहीं हो सकता। याद रखिए, वास्तविक रिश्ते जीवन की वह अमूल्य पूंजी हैं जिन्हें केवल ‘रिचार्ज’ नहीं, बल्कि प्रेम, समय और संवेदनाओं से निरंतर ‘सींचना’ पड़ता है। यदि हम संबंधों की गर्माहट को बचाए रख सके, तभी हमारी मानवीय संवेदनाएँ जीवित रह पाएँगी। अन्यथा, इंसानों की इस भीड़ में हम केवल एक ‘प्रोफाइल’ बनकर रह जाएँगे। लेखक: परमानन्द गोयल
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छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन मॉडल से गांव-गांव तक पहुंच रही जनकल्याणकारी योजनाएं
रायपुर/सुशासन तिहार में मिले आयुष्मान कार्ड से पेंड्रा की निधि रजक के जीवन में आई नई उम्मीद, जरूरतमंद परिवारों को…
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छत्तीसगढ़
चिरायु योजना से मिली नई जिंदगी: समीरा और नितिन ने मुख्यमंत्री को थैंक यू कार्ड देकर जताया आभार’
रायपुर/सुशासन तिहार में भावुक पल : मुख्यमंत्री से मिलकर बच्चों और अभिभावकों की आंखों में छलकी खुशी’ गरीब परिवारों के…
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छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों को अपने हाथों से पहनाया नजर का चश्मा’
रायपुर/सुशासन तिहार शिविर में स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल का किया निरीक्षण’ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार जिले के करहीबाजार…
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छत्तीसगढ़
सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय’
रायपुर/बलौदाबाजार के करहीबाजार समाधान शिविर में हितग्राहियों को सौंपे लाभ, विभिन्न योजनाओं की दी जानकारी’ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज…
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छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत’
रायपुर/सुशासन तिहार 2026 के समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों से किया सीधा संवाद’ सुशासन तिहार 2026…
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टॉप न्यूज़
BJP को पीछे छोड़ने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को मिला नया ‘विपक्ष’
BJP को पीछे छोड़ने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को मिला नया ‘विपक्ष’ सोशल मीडिया पर शुरू हुआ राजनीतिक व्यंग्य अब…
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छत्तीसगढ़
संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक उषा कुंजाम बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा’
रायपुर/प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना से शुरू किया व्यवसाय अब सुदूर आदिवासी गांव में दे रही हैं रोजगार’…
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छत्तीसगढ़
बस्तर के सुदूर वनांचल ग्राम भेजा के सुशासन तिहार में ग्रामीणों को मिला योजनाओं का लाभ’
रायपुर/शासन-प्रशासन को सीधे जनता के द्वार तक पहुंचाने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने के उद्देश्य से बस्तर जिले…
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