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छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : शासन बना बेटियों का संबल और सामूहिक विवाह बना सामाजिक बदलाव का उत्सव

रायपुर/छत्तीसगढ़ में इन दिनों जब भी सामूहिक विवाह समारोहों में शहनाइयां गूंजती हैं, तो वह केवल दो लोगों के वैवाहिक बंधन में बंधने का अवसर नहीं होता, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और संवेदनशील शासन व्यवस्था का जीवंत उत्सव बन जाता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में यह योजना प्रदेश में सामाजिक बदलाव की नई इबारत लिख रही है। हजारों परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लाने वाली यह पहल वास्तव में “बेटियों के साथ सुशासन का आशीर्वाद” बनकर उभरी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने हजारों गरीब परिवारों की चिंताओं को कम करते हुए बेटियों के सपनों को नई पहचान दी है। यह योजना आज प्रदेश में सामाजिक समरसता, महिला सम्मान और जनकल्याण का ऐसा मॉडल बन चुकी है, जिसने यह साबित किया है कि शासन की योजनाएं यदि संवेदनशील सोच के साथ लागू हों, तो वे सीधे लोगों के जीवन में खुशियां ला सकती हैं।

एक योजना, जिसने बदली हजारों परिवारों की स्थिति

गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बेटियों का विवाह अक्सर आर्थिक चिंता का बड़ा कारण बन जाता है। कई बार परिवार कर्ज लेने को मजबूर होते हैं, तो कई बार सामाजिक दबाव और फिजूलखर्ची उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर देती है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत की गई।
योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि विवाह को गरिमामय, सादगीपूर्ण और सामाजिक सहयोग का माध्यम बनाना है। यह योजना सामूहिक विवाहों को बढ़ावा देकर दहेज जैसी कुरीतियों पर भी प्रभावी रोक लगाने का काम कर रही है।
राज्य शासन ने योजना को और अधिक मानवीय स्वरूप देते हुए विधवा, अनाथ और निराश्रित कन्याओं को भी इसमें शामिल किया है, इससे यह योजना सामाजिक सुरक्षा और संवेदनशीलता की मिसाल बन गई है।

50 हजार रुपये की सहायता, सम्मान के साथ नई शुरुआत

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों तथा मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के कार्डधारी परिवारों की 18 वर्ष से अधिक आयु की अधिकतम दो कन्याओं को लाभ प्रदान किया जाता है।
प्रत्येक कन्या विवाह हेतु शासन द्वारा अधिकतम 50 हजार रुपये तक सहायता दी जाती है। इसमें वर-वधु के लिए श्रृंगार सामग्री, उपहार सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही 35 हजार रुपये की राशि बैंक ड्राफ्ट के रूप में दी जाती है, जिससे नवदंपति आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ अपने नए जीवन और खुशहाल की शुरुआत कर सकें। विवाह आयोजन की व्यवस्थाओं पर भी प्रति कन्या 8 हजार रुपये तक खर्च किया जाता है।

24 हजार से अधिक बेटियों के जीवन में आई नई खुशियां

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश में 24 हजार से अधिक बेटियों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है। यह केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की खुशी और राहत की कहानी है, जिनके लिए बेटियों का विवाह कभी बड़ी चिंता हुआ करता था।
प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3200 विवाहों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 347 विवाह पहले ही संपन्न हो चुके थे, जबकि 8 मई 2026 को आयोजित राज्यव्यापी सामूहिक विवाह समारोहों में 1385 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। इस प्रकार अब तक कुल 1732 जोड़े वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत कर चुके हैं।
8 मई 2026 को प्रदेशभर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोहों ने छत्तीसगढ़ को उत्सवमय बना दिया। रायपुर से लेकर दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक हजारों लोगों ने इन आयोजनों में भाग लिया। हर जिले में पारंपरिक रीति-रिवाजों और सादगी के साथ विवाह सम्पन्न हुए।
इन समारोहों की सबसे बड़ी खूबी इसकी समावेशी भावना रही। हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़े अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह बंधन में बंधे। यह दृश्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बन गया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशील पहल

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस योजना को प्रभावी और जनहितकारी स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मार्गदर्शन में विभाग द्वारा प्रदेशभर में सुव्यवस्थित सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।
श्रीमती राजवाड़े लगातार यह सुनिश्चित कर रही हैं कि हर आयोजन में नवदंपति और उनके परिजनों को गरिमापूर्ण वातावरण मिले। विवाह स्थलों की सजावट, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था विभाग द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना केवल सहायता योजना नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान और सामाजिक समानता का अभियान है।

6412 जोड़ों का विवाह और विश्व रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने राष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ को नई पहचान दिलाई है। 10 फरवरी 2026 को आयोजित वृहद सामूहिक विवाह समारोह में 6412 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम ऐतिहासिक बन गया और इसके लिए छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि सामूहिक विवाह केवल सामाजिक सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और जनभागीदारी की मजबूत मिसाल भी बन सकता हैं।

सुशासन का संवेदनशील चेहरा

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आज छत्तीसगढ़ में सुशासन के संवेदनशील और मानवीय स्वरूप का प्रतीक बन चुकी है। यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि बेटियों को सम्मान, परिवारों को आत्मविश्वास और समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम कर रही है।

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