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योग: भारत की विश्व को अमूल्य देन

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस – 21 जून

लेखक : परमानन्द गोयल, कोटा
 योग भारत की प्राचीनतम और सबसे अनमोल देन है। यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने वाली सम्पूर्ण जीवन पद्धति है। आज यह परम्परा सीमाएँ लांघकर विश्व-संस्कृति बन चुकी है।
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की नींव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में रखी। 11 दिसंबर 2014 को 193 देशों ने 21 जून को योग दिवस घोषित किया। पहला आयोजन 21 जून 2015 को हुआ। 21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन है, जिसे नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
21 जून 2026 को 12वां योग दिवस मनाया जाएगा। इस वर्ष का विषय ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग’ है, जिसका उद्देश्य वृद्धावस्था में गतिशीलता, स्वतंत्रता और जीवन-गुणवत्ता बढ़ाना है। प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता के रेड रोड पर मुख्य समारोह का नेतृत्व करेंगे, वहीं स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण आंध्र प्रदेश के अमरावती में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के साथ योग संगम करेंगे।
 कोटा के लिए योग दिवस विशेष स्मृति है। 21 जून 2018 को आरएसी ग्राउंड पर लगभग डेढ़ लाख लोगों ने एक साथ योग कर ‘एक स्थान पर सर्वाधिक योग’ का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। स्वामी रामदेव की उपस्थिति, तत्कालीन कलेक्टर गौरव गोयल और हजारों स्वयंसेवकों के सहयोग ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाया।
योग के लाभ बहुआयामी हैं। शारीरिक रूप से यह लचीलापन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और हृदय-फेफड़ों को सुदृढ़ करता है। मानसिक रूप से तनाव घटाता है, एकाग्रता बढ़ाता है और नींद सुधारता है। आध्यात्मिक रूप से आत्मज्ञान और सकारात्मक दृष्टिकोण देता है।
2026 का संदेश स्पष्ट है, आयु बढ़ना बोझ नहीं, योग से अवसर है। आइए इस योग दिवस पर संकल्प लें कि योग को दैनिक जीवन का अंग बनाएँ और स्वस्थ, सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करें।
 “योग: एकता की ओर एक कदम – शरीर, मन और आत्मा का अनुपम मेल।”

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