छत्तीसगढ़

अव्यवस्थाओं के बीच भगवान भरोसे संचालित हैं बलरामपुर जिले के आदिवासी छात्रवास

कुसमी/ आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित कुसमी विकासखंड के आश्रम-छात्रावासों में इन दिनों प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्टाचार का खुला खेल चल रहा है। विभागीय अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर चहेते शिक्षकों को दो-दो संस्थाओं का दोहरा प्रभार सौंप दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ छात्रावास एक-दूसरे से 18 किलोमीटर दूर हैं। ऐसे में सुदूर वनांचल के इन आश्रमों में रह रहे आदिवासी छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य और अनुशासन पूरी तरह से ‘रामभरोसे’ या यूँ कहें कि चपरासियों के भरोसे चल रहा है।
आदेशों को दिखाया ठेंगा; आपात स्थिति में कौन होगा जिम्मेदार?

यह पूरा मामला इसलिए भी तूल पकड़ रहा है क्योंकि आदिम जाति विकास विभाग ने 13 सितंबर 2023 को पत्र क्रमांक एफ 9-7/2010/25-1 जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आश्रम-छात्रावासों में अधीक्षकों की व्यवस्था नियमानुसार की जाए। इस पत्र में सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2019 के कड़े आदेशों का हवाला भी दिया गया था, जिसमें ‘एक छात्रावास, एक अधीक्षक’ की नीति अनिवार्य की गई थी। इसके बावजूद कुसमी में नियमों को मटियामेट किया जा रहा है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का सवाल है कि यदि 18 किलोमीटर दूर स्थित दोनों छात्रावासों में एक ही समय पर कोई आपात स्थिति या अनहोनी हो जाए, तो प्रभारी शिक्षक किस संस्था में पहुंचेगा?

दूसरे विकासखंड से लाकर प्रभार देने के पीछे ‘चढ़ावे’ का खेल!

विभागीय गलियारों में इस समय यह चर्चा जोरों पर है कि अधिकारियों को मोटी रकम और ‘चढ़ावा’ चढ़ाकर मलाईदार प्रभार हासिल किए जा रहे हैं। मामला तब और गंभीर हो गया जब यह खुलासा हुआ कि कुसमी विकासखंड के बाहर (दूसरे विकासखंड) से भी शिक्षकों को लाकर यहाँ के छात्रावासों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ को लेकर विभाग के भीतर ही कानाफूसी और भारी असंतोष है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इन बाहरी शिक्षकों की मूल पदस्थापना कहां है, उन्हें किस प्रशासनिक आधार पर लाया गया, और उनकी एनओसी व प्रभार आदेश की वैधता क्या है?

ये हैं वो प्रभार, जहाँ नियमों की उड़ रही हैं:

दूरी 18 किलोमीटर – पहाड़ी कोरवा बालिका छात्रावास धनेसपुर एवं कन्या आश्रम कुसमी: इन दोनों अतिसंवेदनशील महिला/बालिका संस्थानों के बीच की दूरी लगभग 18 किमी है, लेकिन दोनों का जिम्मा अकेले अधीक्षिका बसंती लकड़ा के पास है।

दूरी 6 किलोमीटर – बालक आश्रम सीवीलदाग एवं प्रीमैट्रिक छात्रावास नीलकंठपुर: इनका अधीक्षक शंकरगढ़ विकासखंड के जय सिंह को बनाया गया है, जो मूल रूप से माध्यमिक शाला जामपानी में वर्ग-2 के शिक्षक हैं।
दूरी 7 किलोमीटर – प्रीमैट्रिक छात्रावास कुसमी एवं प्रीमैट्रिक छात्रावास रामनगर: इन दोनों छात्रावासों का प्रभार भी एक ही अधीक्षक जयकिशन के हवाले है।
दूरी 7 किलोमीटर – प्रीमैट्रिक छात्रावास भूलसी और पहाड़ी कोरवा आश्रम जिगनिया: इन दोनों का एक ही अधीक्षक रत्नेस बंजारे को बनाया गया है। चर्चा है कि इनका प्रमोशन राजपुर में हो चुका है, लेकिन मलाईदार प्रभार के चक्कर में ये कुसमी में ही ‘कुंडली मारकर’ जमे हुए हैं।

दस्तावेज सार्वजनिक करने की उठी मांग, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

इस अव्यवस्था को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और छात्र संगठनों में भारी आक्रोश है। मांग की जा रही है कि कुसमी विकासखंड के सभी आश्रम-छात्रावासों के वर्तमान प्रभारियों की सूची, उनके मूल पदस्थापना आदेश और कथित एनओसी को तत्काल सार्वजनिक (Public) किया जाए ताकि साठगांठ का सच सामने आ सके।

एक सप्ताह में सुधरेगी व्यवस्था: मंडल संयोजक

जब इस पूरे गड़बड़झाले को लेकर मंडल संयोजक से बात की गई तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि जिन भी शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, उन्होंने बकायदा एनओसी दी है। हालांकि, चौतरफा दबाव के बीच उन्होंने स्वीकार किया कि विभाग से नए कड़े निर्देश मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि आगामी एक सप्ताह के भीतर सभी छात्रावासों में सिंगल-अधीक्षक की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाएगी।

अब देखना यह है कि विभाग एक सप्ताह के भीतर इस दोहरी प्रभार व्यवस्था को खत्म कर बच्चों को सुरक्षित माहौल देता है या फिर कागजी दावों के पीछे भ्रष्टाचार के इस सच को दबा दिया जाता है।

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