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21वीं सदी में फिटनेस की नई धुरी बनता जिम कल्चर परमानन्द गोयल, कोटा (राजस्थान)

घटता शारीरिक श्रम और बढ़ता मशीनी दखल

वर्तमान 21वीं सदी जीवनशैली के स्तर पर कई बुनियादी बदलावों की गवाह बन रही है। कभी शरीर को मजबूत बनाने के लिए अखाड़े का रुख किया जाता था, फिर जिम आए और आज वे आधुनिक ‘फिटनेस सेंटर’ के रूप में जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि आज जिम केवल ‘बॉडी बनाने’ की जगह नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और ऊर्जावान दिनचर्या का केंद्र बन चुका है।
 घटता शारीरिक श्रम और बढ़ता मशीनी दखल
 आधुनिक जीवनशैली ने सुविधाएं तो असीम दी हैं, लेकिन दैनिक शारीरिक श्रम को न्यूनतम कर दिया है। घरेलू स्तर पर वाशिंग मशीन, मिक्सर-ग्राइंडर, फूड प्रोसेसर, डिशवॉशर, आटा मेकर और रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर ने मेहनत घटा दी है। दफ्तरों में रिवॉल्विंग चेयर, सीढ़ियों की जगह लिफ्ट-एस्केलेटर और स्क्रीन आधारित घंटों की सिटिंग जॉब्स ने शरीर की स्वाभाविक सक्रियता छीन ली है। दूसरी ओर, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड जंक फूड और देर रात तक जागने की आदतों ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ा दी हैं। ऐसे माहौल में नियमित व्यायाम अब शौक नहीं, बल्कि अनिवार्य आवश्यकता बन गया है।
 “जिम में हम सिर्फ बॉडी नहीं बनाते, लाइफस्टाइल बनाते हैं। फिटनेस एक दिन का टारगेट नहीं, रोज की आदत है। जो 30 से 45 मिनट तक रोज अपने लिए निकालता है, वही लंबे समय तक ऊर्जावान रहता है।” — प्रीतम सरकार, कोच, Cult Gym Kota
 वर्कआउट और खान-पान: मिलेट्स का नया संगम
 जिम में बहाया पसीना तभी सार्थक होता है जब पोषण संतुलित हो। प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेश त्रेहन अक्सर कहते हैं कि स्वस्थ दिल के तीन मूल मंत्र हैं—सही खाओ, नियमित व्यायाम करो और तनाव घटाओ। डॉ. त्रेहन भोजन में तीन ‘सफेद चीजों’—नमक, शक्कर और मैदा को न्यूनतम करने की सलाह देते हैं।
 इसके साथ ही विशेषज्ञ केवल गेहूं के आटे पर अत्यधिक निर्भरता को भी मोटापे का एक कारण मानते हैं। यही वजह है कि अब फिटनेस के प्रति जागरूक लोग गेहूं के साथ मक्का, बाजरा, ज्वार, जौ और रागी जैसे मोटे अनाजों (मिलेट्स) को प्राथमिकता दे रहे हैं। आधुनिक जिम और पारंपरिक मिलेट्स का यह संगम ही 21वीं सदी की वास्तविक फिटनेस है।
 बीमारी से पहले स्वास्थ्य पर निवेश
 सोच में एक बड़ा बदलाव यह आया है कि लोग अब बीमारी के बाद इलाज कराने के बजाय पहले से ही स्वास्थ्य पर निवेश कर रहे हैं। जेन-जी (1997-2012) और जेन-वाई (1981-1996) के साथ-साथ अब जेन-एक्स (1965-1980) तथा बेबी बूमर्स (1946-1964) भी फिटनेस सेंटरों का हिस्सा बन रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक अपनी क्षमतानुसार वर्कआउट और योग को दिनचर्या में जोड़ रहे हैं।
 “मेरा वजन अधिक होने से जल्दी थकान हो जाती थी। तीन महीने नियमित जिम करने से 5 किलो वजन कम हुआ और आत्मविश्वास 50 फीसदी तक बढ़ गया। अब मैं अधिक स्फूर्ति के साथ काम करता हूँ।” — दीपक वर्मा, जिम सदस्य, कोटा
 संगठित फिटनेस उद्योग और कोटा का परिदृश्य
 फिटनेस आज भारत में एक संगठित उद्योग बन चुका है। Cult.fit ने तकनीक और ग्रुप वर्कआउट से फिटनेस को नया रूप दिया है। वहीं Gold’s Gym, Anytime Fitness, Snap Fitness और Plus Fitness जैसे ब्रांड महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक विस्तार कर चुके हैं।
 शिक्षा नगरी कोटा में कोचिंग छात्रों और कामकाजी युवाओं के बीच मानसिक तनाव घटाने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए जिमिंग बेहद लोकप्रिय हुई है:
 प्रमुख आधुनिक ब्रांड्स: विज्ञान नगर स्थित Cult Gym अपने बहुमंजिला सेटअप में स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग (S&C), बॉक्सिंग बैग, डांस फिटनेस और एचआरएक्स वर्कआउट जैसे कई प्रारूपों के साथ सुबह 6 से रात 11 बजे तक सेवाएं दे रहा है। गुमानपुरा रोड पर Anytime Fitness और Gold’s Gym अंतरराष्ट्रीय उपकरणों, सर्टिफाइड पर्सनल कोचिंग और योग-जुम्बा क्लासेज के लिए पसंद किए जा रहे हैं। विज्ञान नगर का The Gym और गुमानपुरा का FitX Gym भी लचीले समय के कारण भरोसेमंद विकल्प हैं।
 सुलभ और बजट-फ्रेंडली विकल्प: शहर के विभिन्न इलाकों में Deva Fitness, Slim Fast Fitness (लाला लाजपत राय सर्किल), बोरखेड़ा क्षेत्र में YDR Health Club और Ultimate Gym जैसे केंद्र स्थानीय नागरिकों को किफायती फिटनेस सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
 मशीनों से अधिक महत्वपूर्ण अनुशासन और सावधानी
 जिम की आधुनिक परिभाषा में सिर्फ भारी वजन उठाना शामिल नहीं है, बल्कि कार्डियो, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मोबिलिटी, लचीलापन और मानसिक शांति का संतुलन आवश्यक है। भारी वजन वाले व्यायाम हमेशा सर्टिफाइड ट्रेनर की देखरेख और सही तकनीक के साथ ही किए जाने चाहिए। साथ ही, बिना चिकित्सीय या विशेषज्ञ सलाह के मनमाने ढंग से सप्लीमेंट्स लेने से बचना चाहिए।
 फिटनेस का अंतिम लक्ष्य आईने में दिखने वाला केवल आकर्षक शरीर नहीं, बल्कि ऐसा सशक्त मन और तन तैयार करना है जो रोजमर्रा की जिंदगी की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास और स्फूर्ति के साथ कर सके।
परमानन्द गोयल, कोटा (राजस्थान)

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