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छत्तीसगढ़

संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक उषा कुंजाम बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा’

रायपुर/प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना से शुरू किया व्यवसाय अब सुदूर आदिवासी गांव में दे रही हैं रोजगार’ और सुविधाएं

3.90 लाख रूपए के लोन से स्थापित की राइस मिल और टोरा मिल प्रसंस्करण इकाई’

अपनी कड़ी मेहनत और अटूट आत्मविश्वास के दम पर बीजापुर जिले के सुदूर आदिवासी गांव मुरदोण्डा (तहसील- उसूर) की रहने वाली 38 वर्षीय श्रीमती उषा कुंजाम ने संघर्ष भरे जीवन को सफलता की नई पहचान दी है। आज वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन चुकी हैं।
’तंगी के दिनों से उद्यमिता तक का सफर’
श्रीमती उषा कुंजाम लंबे समय तक बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझती रहीं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच आय का कोई स्थायी साधन नहीं था और सुदूर वनांचल क्षेत्र होने के कारण रोजगार के अवसर भी बेहद सीमित थे। इसी बीच उन्हें जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बीजापुर के माध्यम से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना की जानकारी मिली। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने ऋण के लिए आवेदन किया और वित्तीय वर्ष 2025-26 में आईसीआईसीआई बैंक की बीजापुर शाखा से उन्हें 3 लाख 90 हजार 400 रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ।
महुआ टोरा प्रसंस्करण से बदली किस्मत’
इस आर्थिक सहायता से उषा कुंजाम ने अपने गांव में ही राइस मिल और टोरा मिल (महुआ बीज) प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की। इस पहल से स्थानीय स्तर पर बड़ा बदलाव आया है। टोरा तेल का वैल्यू एडिशन- पहले क्षेत्र में टोरा सिर्फ 8 से 10 रुपये प्रति किलो के मान से कौड़ियों के दाम बिकता था। अब उषा इससे तेल निकालकर आकर्षक पैकेजिंग करती हैं और बाजार में 100 प्रति लीटर की दर से बेच रही हैं। पूजा-पाठ और त्योहारों में उपयोग होने के कारण इस तेल की बाजार में भारी मांग है।
तेल निकालने के बाद बची हुई खली को भी वे 12 से 15 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर अतिरिक्त मुनाफा कमा रही हैं।
गांव वालों को घर के पास मिली राइस मिल की सुविधा’
गांव में राइस मिल शुरू होने से स्थानीय ग्रामीणों को भी बड़ी राहत मिली है। पहले धान से चावल निकलवाने के लिए ग्रामीणों को मीलों दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा गांव में ही सुलभ हो गई है। इसके साथ ही धान प्रसंस्करण से निकलने वाले ब्रान, चोकर और भूसी को बेचकर भी वे अपनी आय बढ़ा रही हैं।
महिला उद्यमी श्रीमती उषा कुंजाम ने बताया कि शुरुआत में तकनीकी जानकारी की कमी, सीमित संसाधन और बाजार तक पहुंच जैसी कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। आज जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के मार्गदर्शन से मेरी आर्थिक स्थिति मजबूत हो चुकी है और मैं समय पर बैंक की किस्तें भी चुका रही हूं। उषा कुंजाम ने अपनी इस शानदार सफलता का श्रेय बीजापुर के जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को दिया है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य युवाओं और महिलाओं से भी आह्वान किया है कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं और खुद का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनें।

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