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छत्तीसगढ़

सुशासन तिहार : खुशियों का द्वार बना समाधान शिविर, 2 साल के नन्हे अरनव को मिली अपनी डिजिटल पहचान

रायपुर/मुख्यमंत्र विष्णु देव साय के सुशासन के संकल्प का असर अब सीधे आम जनता के चेहरों पर मुस्कान बनकर झलक रहा है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित सुशासन तिहार के अंतर्गत समाधान शिविर न केवल समस्याओं का निपटारा कर रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में नई खुशियां भी ला रहे हैं। इसी कड़ी में महासमुंद विकासखंड के ग्राम अछोला से सुशासन की एक बेहद सुखद और प्रेरक तस्वीर सामने आई है।

शिविर में हुआ हाथों-हाथ आधार पंजीयन
ग्राम अछोला निवासी देवव्रत गोलदार और उनकी पत्नी श्रीमती गायत्री गोलदार अपने 2 वर्षीय पुत्र अरनव के साथ शिविर में पहुंचे थे। माता-पिता की इच्छा थी कि उनके लाडले की अपनी एक डिजिटल पहचान (आधार/पहचान पत्र) हो। जैसे ही उन्होंने समाधान शिविर में इसके लिए आवेदन किया, प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर ही पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर दी।

माता-पिता ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
अपने बच्चे की डिजिटल पहचान इतनी सहजता और शीघ्रता से सुनिश्चित होते देख माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भावुक मन से देवव्रत और गायत्री ने कहा कि हमने सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी और आसानी से काम हो जाएगा। ये शिविर वास्तव में जनता की समस्याओं के समाधान का सच्चा केंद्र साबित हो रहे हैं। उन्होंने इस संवेदनशील पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

सुशासन का धरातल पर असर
यह छोटी सी घटना इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रही हैं। समाधान शिविरों के माध्यम से शासन और प्रशासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुँच रहा है, जिससे आम लोगों के समय और श्रम की बचत हो रही है।

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